Saturday, August 20, 2016

माँ को देखा गांड मरवाते हुए

में महीने के आखरी दिन चल रहे थे और मैं और अंकुर हमारें बरामदे पर बैठे केरम से टाइम पास कर रहे थे. अंकुर मेरे अंकल श्यामलाल का बेटा था और उसकी उम्र भी मेरी जितनी 18 साल और एकाद महीने की थी. वोह कुछ उदास लग रहा था. मैंने उसे एक दो बार पूछा लेकिन वह कुछ बोला नहीं. मेरे ज्यादा पूछने पर उसकी आँख से आंसू निकल पड़ा. मैंने उसे जब पानी देकर इसकी वजह पूछी तो उसने जो वजह बताई वह सुनकर मैं भी दंग रह गया. अंकुर ने अपनी मम्मी सविता की गांड मरवाने की कहानी बताई मुझे. सविता चाची मेरी सब से छोटी चाची थी और उसका ब्याह बहुत कम उम्र में श्यामलाल अंकल से हो गया था. वो तक़रीबन 36-37 की होगी, लेकिन उसका बदन काफी भारी था और उसकी गांड उसके व्यक्तित्व का सबसे खिंचाव वाला अंग था. अंकुर ने मुझे जो कहानी बताई वोह कुछ इस प्रकार थी. आगे की कहानी आप अंकुर के जबान में ही सुन ले….!!!

भैया को सुला के भाभी को चोदा

“अरे उषा भाभी कहाँ हो आपका बच्चा रो रहा हैं. देखो उसके आँखों से आंसू और नाक से गंदगी टपक रही हैं. “…उषा भाभी को चिराग ने आवाज लगाई. उषा उसके घर में ही रहती एक सेक्सी इंडियन भाभी थी. उषा की उम्र कुछ 27 साल की थी और चिराग कोलेज के तीसरे वर्ष में था. कम लोग ही जानते थे की यह बच्चा चिराग का ही था, क्यूंकि उषा आंटी उसके घर में कुछ 3 साल से रह रही थी और उसका पति सूबेदार वीरसिंह सेना में तैनात होने की वजह से लगभग पूरा साल बहार रहेता था. चिराग का चक्कर इस सेक्सी भाभी से चल गया था और वोह दोनों चुदाई के हथकंडे आजमाते रहते थे. किसीको पता ना चले इसलिए चिराग और उषा ने एक डोक्टर को पैसे दे खरीद लिया था जिसने बच्चे की डिलीवरी समय से पहले हो गई यह बहाना बताया था नहीं तो यह सेक्सी भाभी की पोल पकड़ी जाती.

Friday, August 19, 2016

विधवा की गांड का सिल खोला

मैं 21 साल का हूँ और मेरी लम्बाई 5 फुट 6 इंच है। मेरा रंग हल्का और इकहरी देह है, मेरा लंड 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मेरा हमेशा से ही लड़कियों और आंटियों के साथ चुदाई करने का मन करता रहा है, ख़ास तौर से आंटियों के प्रति कुछ ज्यादा ही वासना रही है। अब मैं कहानी पर आता हूँ यह कहानी आज से छ: महीने पहले की है जब मेरे कॉलेज की छुट्टियाँ चल रही थीं तो एक दिन जब मैंने बहुत दिन बाद अपनी जीमेल आईडी खोली तो उसमें एक रानी नाम की लड़की का एक मेल देखा।
मैंने उसे खोल कर देखा, उसमें लिखा था- क्या आप मुझसे दोस्ती करोगे?
पहले तो मेरे मन लड्डू फूटने लगे, पर मुझे पता था कि जरूर यह मेल मेरे किसी दोस्त ने भेजा है तो मैंने भी ‘यस’ करके वापिस रिप्लाई कर दिया और मैंने मेल बंद कर दी।

छत पर चुद गई जवान साली

मेरी शादी को दो साल हो चुके है और जब मेरी पत्नी ने मुझे बताया ककी वह गर्भवती है तो मे उस दिन बहुत ही खुस हो गया, 5 किलो लड्डू ला के मैंने पुरे महोल्ले मे बाँट दिए. अब बीवी का ख़याल रखना था और उसे कम से कम कष्ट पड़े इस लिए मैंने अपने ससुराल फोन कर के अपनी साली कुसुम को यहाँ बुलवा लिया थोड़े दिन के बाद. कुसुम की पढाई पूरी हो चुकी थी और वह घर पे ही होती थी. कुसुम मेरे साथ बहुत हंसी मजाक करती थी और वह दिखने मैं भी बहुत सेक्सी थी, बड़े चुंचे, गोरे गाल, मस्त चाल और दो शब्दों में कहूँ तो टाईट माल. कुसुम के यहाँ आने के बाद एक रात को शराब के नशे में मैंने उसके साथ चुदाई कर डाली और उसकू चूत और गांड दोनों में अपना लंड डाल दिया था..आइए देखे यह सब कैसे हुआ.

खुले खेत में चुदाई

दिवाली के दिन थे और गाँव में मेला लगा हुआ था. मेरे लिए यह बड़ा सही मौका था मेरी शादीसुदा गर्लफ्रेंड मीना भाभी को चोदने का. मीना को चोदना मुझे बहुत अच्छा लगता था और मीना थी ही ऐसी की उसे देख कर चोदन का मन हो जाता था. मीना हमारे पडोसी रामलाल की बहु थी और उसका पति सोनू एक नंबर का चरसी और जुआरी था. मीना जब से यहाँ शादी कर के आई थी उसने शायद दुःख ही देखा था, लेकिन उसका टाका मेरे से भीड़ गया था और हम दोनों के नसीब की चुदाई हम लोगो को मिल रही थी. मैंने सुबह ही जब मीना भाभी हगने के लिए खेत में गई थी तो उसे मंजू के हाथ लेटर भेज के शाम को खेतों पार आये मेले में मिलने के लिए राजी कर लिया था. मंजू जवाब ले के आई थी की मीना भाभी आएंगी लेकिन मुझे उसने वही पिली शर्ट डाल के आने को बोला था जिसे पहन के मैं पहली बार उसके सामने आया था.

नौकर का बड़ा लंड

गेहूं की बोरिया उतार के भीमा ओटे के उपर बैठ गया और मैंने उसे पानी ला के दिया. मेरे पति के मरने के बाद भीमा ने ही सारे खेत की जिम्मेदारी संभाली थी और वो हर सीजन में अनाज या दूसरी फसल उगा के मुझे पैसे या तो अनाज घर तक पहुंचा देता था. भीमा की इसी ईमानदारी ने मुझे उसके तरफ आकर्षित किया था. मुझे भी भरी जवानी में शरीर सुख का आसरा गुमाने के बाद एक वफादार और सुरक्षति साथी की तलाश थी जो मुझे अपने लंड का सहारा दे सके. भीमा से मैं अक्सर चुदाई करवाती थी और उसका लंड मेरी 35 साल की ढलती जवानी का सहारा था. उसने आज तक जरा भी जाहिर नहीं होने दिया था की मैं उसका लंड लेती हूँ, दुनिया के सामने वो वही किसान था जो हमारे खेतो में जोतता था और हमारे घर का एक मुलाजिम था. भीमा की बीवी शांति भी हमारे सबंध से वाकिफ थी और उसे भी इसमें कोई एतराज नहीं था, वह शायद इसलिए की मैं भीमा और उसकी फेमिली की पूरी जिम्मेदारी उठाये हुए थी.

Thursday, August 18, 2016

वर्जिन चूत का मजा

उन दिनों मेरी उम्र कुछ 21 की थी और मैं इंजीनियरिंग के दुसरे वर्ष में पढाई करता था. कोलेज जीवन में दारु और सिगरेट के अलावा कुछ काम था नहीं इसलिए मैं अपना साल बरबाद कर चूका था. मेरे निकम्मे दोस्तों की तरह मुझे भी 6 माह घर पर बिताने थे. मुझे घर पर रहेना वैसे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता था. यहाँ गाय भेंस और गोबर था. मेरे पिताजी वैसे अनाज के बड़े व्यापारी थी और उन्हें इसी वजह से गाँव में रहना पड़ता था क्यूंकि फसल तो यहीं से आती यही इसलिए कम से कम दाम में अनाज यही से खरीदा जा सकता था. बुढा कमाता था लेकिन मुझ से पाई पाई का हिसाब लेता था. उन दिनों काफी बारिश के चलते मेरे पिता के मुनीम हरीलाल के घर की दिवार धंस गई थी और वोह अपनी बीवी निर्मला और बेटी पिंकी के साथ मेरे पिता ने दिए रूम में रह रहे थे.